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गरीब के प्याज | Hindi literature, Diwakar Godiyal

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  गरीबी अभिशाप है। जो इसे जीता है वही जानता है कि हर क्षण यह दुनिया उसे इसका आभास कराती है विशेष कर वह गरीबी जो हमेशा अमीरों के बीच दौड़ धूप करती हो उसे आभास होता है कि वह गरीब है उन सब के बीच सबसे बुरी स्थिति में है। गरीबों के बीच गरीबी अच्छी हो सकती हैं। एक गांव हो जहां सभी एक जैसे पत्थर के मकान हो तो सबके हो, कुछ पालतू जानवर हो तो सबके हो, और बाकी अपना परिवार। लेकिन यह बुद्धिमत्ता और बेहतर होने की होड़ न हो। सचमुच वह गांव गरीबों का जरूर होगा किंतु खुशहाल किसी अमीर से अमीर गांव से कई अधिक होगा।  कल घर से निकला तो कोई खास उद्देश्य तो था नहीं बस चलते रहना था। लेकिन मुझे रुकना पड़ा एक आदमी प्याज का ठेला लगाए हुए था। उसमें बहुत कम एक किनारे पर लहसुन थे बाकी प्याज थे, इतना भी नहीं की ठेला भरा हो‌। मैंने देखा एक जोड़ा अपनी स्कूटी पर ठेले के पास आकर रुका वह उतरा भी नहीं बैठे-बैठे ही पूछा प्याज के भाव उस ढेले वाले आदमी ने जो भाव बताया वह उन्हें समझ नहीं आया पत्नी ने कहा पति को "चलो"  स्कूटी की गति बढ़ता ही था पति की, ठेले वाले का एक और ऑफर आया कुछ कम लगाकर, पत्नी ने अपनी बात सा...

एनडीए सरकार की बढ़ती ताकत | विपक्ष के कमजोर क्या प्यादे गिर रहे हैं!

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देश की राजनीति में इस समय पर जोड़-तोड़ का कार्य चल रहा है। एनडीए सरकार को संसद में अपना समर्थन बढ़ाना है। संख्या को कम से कम इतना लेकर जाना है, कि वह परिसीमन के विधेयक को महिला आरक्षण के विधेयक को पास करवा सकें। यह उनके लिए बहुत जरूरी है तृणमूल कांग्रेस को लेकर जो खबरें चल रही हैं समाजवादी पार्टी को लेकर और उद्धव ठाकरे के शिवसेना को लेकर जो खबरें हैं यह सब इसी गणित का हिस्सा है। उधर दक्षिण में डीएमके की असंतुष्ट स्थिति भी काम में लाई जा सकती है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी कितना समर्थन जुटा पाती है इसकी पूरी गणित को कुछ इस प्रकार से समझेंगे।  तृणमूल कांग्रेस की बिखरती शक्ति : हाल में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों में भी बगावत हो गई है। पहले तो विधानसभा में कई नेताओं ने बगावत कर दी पार्टी के हाई कमान की बात मानने से इनकार कर दिया। यह सब ममता बनर्जी के चुनाव हार जाने के बाद हुआ है, उससे पहले तक सब ठीक था टीएमसी की सरकार थी और एक बार फिर से सरकार बनने की आश थी तब तक सब ठीक था लेकिन जैसे ही चुनाव हार गई ममता बनर्जी सारा मामला बिगड़ गया, सारे नेता अपने-अपने रास्ते निकल पड़े। ऋतव्रत बनर्जी क...

राहुल गांधी | असफलताओं का अंबार लिए शीर्ष पर खड़े!

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असफल राहुल गांधी : बहुत समय बाद किसी नेता पर लिख रहा हूं किंतु लिख भी रहा हूं राहुल गांधी पर। कोई साधारण नेता नहीं है भारतीय राजनीति में ऐसे नेता जो सत्ता में रहें या विपक्ष में किंतु रहेंगे सबसे ऊपर ही ऐसे कई नेताओं में गांधी परिवार के नेता अव्वल रहे हैं। राहुल गांधी का राजनीति में होना इसका एक बड़ा कारण उनका परिवार ही है। उनका जन्म ही उन्हें विशेष अधिकार देता है, कोई कितना इसकी आलोचना करे किंतु आजादी के बाद यह क्रम जारी रहा। गांधी परिवार को कोई रोक न सका समय-समय पर अड़चने आई किंतु अंतिम तौर से उन्हें लांघ लिया गया। हाल में भी स्थितियां वही है असफलताओं का अंबार लिए राहुल गांधी खड़े हैं और कांग्रेस का अक्षुण्ण समर्थक उन्हें सर्वोच्च नेता कहते नहीं थकता। किंतु वो यह विचार नहीं करता की राज परिवार में कभी-कभी कुछ राजकुमार राजनीति में उतने माहिर नहीं होते, इतिहास यही बताता है। ना ही वो यह विचार करता है कि यह लोकतंत्र है राज परिवार का दौर समाप्त हो चुका है। बात युवा और पढ़े-लिखे व्यक्ति होने की है तो देश में मेधावी पढ़े-लिखे युवा सिविल सर्विसेज की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देते हैं। हो सकता था...

जसपाल राणा | वो जिसका निशाना अचूक था | Remembering A Legend

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Jaspal Rana बचपन से दो नाम तो जरूर सुने दोनों नाम खेल जगत से जुड़े हुए। अपने घर में ही जिनकी बात होती या हमें ही किसी कारनामे पर उनके नाम की उपमा दे दी जाती। वह दो नाम थे एक महेंद्र सिंह धोनी और दूसरा जसपाल राणा। यह नाम सुदूर पहाड़ों में हमारे गांव की तरह ही हर गांव के लोगों की याद में था। जिसका वे कभी ना कभी प्रयोग कर ही देते।  धोनी का नाम जानना क्रिकेट के एक बेहद लोकप्रिय खेल होने के कारण हो सकता है। लेकिन जसपाल राणा वह व्यक्ति हैं, जिन्होंने सुदूर मेरे गांव तक शूटिंग के उस खेल को ही बेहद लोकप्रिय बना दिया। गांव गांव तक गढ़वाल में जसपाल राणा एक मेधावी खिलाड़ी और विश्व स्तर पर पहचान पाने वाले चुनिंदा लोगों में शामिल हुए। देश और राज्य को खेल से सपनों को साकार करने का सफल उदाहरण दिया, जसपाल राणा जी ने। आज वह दिया बुझ गया किंतु उसका आलोक शेष रहेगा। शेष रहेगा वह नाम जिसके साए में कई नाम और उठेंगे। जसपाल राणा जी का जन्म 28 जून 1976 को उत्तरकाशी शहर में हुआ था। इनके पिताजी नारायण सिंह राणा से ही इन्होने शूटिंग के गुर सीखे और इन्हीं रास्तों पर चलकर जसपाल राणा देश के सफलतम शूटिंग खिलाड़ी ...

पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणाम | west bengal election results

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West Bengal election results  पश्चिम बंगाल में और अन्य चार राज्यों में असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में वोटो की गिनती शुरू हो चुकी है पश्चिम बंगाल में 293 सीटों पर गिनती शुरू हो चुकी है या आरंभ हो रही है एक सीट फालता में 21 में को फिर से चुनाव होगा कुल सीटों की संख्या 294 है और बहुमत के लिए 148 सीटों की आवश्यकता है। बीजेपी और टीएमसी की तरफ से मजबूत दावे पेश किए गए हैं शुरुआती रुझानों में बीजेपी 100 सीटों पर आगे हैं और टीएमसी 92 सीटों पर आगे है। नरेंद्र मोदी ने पोस्ट कर लिखा है परिश्रम से हर चुनौती पार होगी।  शुरुआती रुझानों में भवानीपुर से ममता बनर्जी आगे चल रही हैं वहीं नंदीग्राम से सुरेंद्र अधिकारी ने बढत बना रखी है सिलीगुड़ी में वोटिंग की गणना अब तक भी शुरू नहीं हो सकी है तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वोट की पेट्टियां ठीक प्रकार से सील नहीं हुई है । बीजेपी के कार्यकर्ताओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के हेड क्वार्टर में मिठाई बनना शुरू हो चुका है। आगे की लाइव अपडेट्स के लिए हमारे इस ब्लॉग के साथ जुड़े रहें...

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत | Modi or Mamta Banerjee

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Mamta Banerjee  नरेंद्र मोदी का विजय रथ पश्चिम बंगाल के चुनाव में बहुत शक्ति से आगे बढ़ा है यह तो अनुमान पहले से ही था की पिछली बार के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन भाजपा कर सकेगी किंतु चुनाव को जीत लेना सरकार बनाने को लेकर जो एग्जिट पोल अब तक जानकारी दे रहे हैं बीजेपी की सरकार पश्चिम बंगाल में बनती हुई नजर आ रही है ममता दीदी के बाद अब लोग दादा को सत्ता में देखना चाहते हैं यह बड़ा बदलाव होगा पश्चिम बंगाल का रुख इस समय पर कुछ तो बदला जरूर है राष्ट्रीय राजनीति का प्रभाव और पश्चिम बंगाल अछूता रह जाए यह संभव नहीं। पिछली बार के चुनाव में 77 सीटों पर सिमटी बीजेपी इस बार ऊंची छलांग लगाकर 160 सीटों पर भी पहुंच सकती है सरकार गठन बीजेपी के हाथ में होगा पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा राजनीतिक दल भी भारतीय जनता पार्टी बन सकती है। हालांकि पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी का गढ़ है 4 तारीख को जब परिणाम आएंगे तब तो सब कुछ साफ हो ही जाएगा किंतु फिर भी एग्जिट पोल एक तरफा बीजेपी की जीत का दम भर रहे हैं बाकी यह बात किसी से छुपी नहीं है कि ममता बनर्जी पिछले 15 वर्षों से पश्चिम बंगाल की राजनीति के मजबूत स्तंभ के तौर पर ह...

पूरी कांग्रेस एक परिवार के सपने को पूरा करने में जुटी है | कौन जगाये कांग्रेस को!

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कांग्रेस यूं तो पूरे देश में अपने तीव्र पतन को देख रही है। एक के बाद एक कई निराशाएं उसके हाथ लगी। एक चुनाव में जीत का जरा कुछ मिठास मुंह लगती है, तो अगले कई चुनाव हार कर वह फीका हो जाता है। अभी हाल में मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने जो कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं एक ऐसा बयान दे दिया जिसके बाद उन्हें हताश और मानसिक दिवालियापन की स्थिति से जोड़ दिया गया। उन्होंने 21 मार्च 2026 को तमिलनाडु के चुनाव को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकवादी शब्द का प्रयोग किया और यह शब्द प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उपयोग किया गया। अब इस बात से धुआं तो उठाना था अगले ही दिन चुनाव आयोग की तरफ से कांग्रेस राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस संदर्भ में कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है। विषय गंभीर बन गया तमाम नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी और कांग्रेस एक बार घिरी घिरी फिर से नजर आती है। अपने लिए खुद समस्याएं बुन रही है आज की कांग्रेस।  यह बात कहने की है कि भारतीय जनता पार्टी के लोग अंधभक्ति में लीन हैं। किंतु कांग्रेसियों के लिए भी यह बात बिल्कुल गलत नहीं है गांधी परिवार की वंदना में कांग्रेसजनों ने वर्षों तक स्व...

15 सालों तक 60 लोग एक द्वीप पर फंसे रहे | एक मार्मिक कहानी

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यह उस समय की बात है जब फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों का पूरी दुनिया पर प्रभुत्व था इनके दुनिया भर में कई उपनिवेश थे भारत भी इसी प्रकार से ब्रिटेन का एक उपनिवेश देश था या यूं कहें की भारत अंग्रेजों का गुलाम था ठीक इसी प्रकार फ्रांसीसियों ने भी दुनिया के तमाम देशों पर अपना कब्जा जमा रखा था अफ्रीकी महाद्वीप के कई क्षेत्रों में फ्रांस का प्रभाव था यहीं से एक बड़ी मार्मिक कहानी शुरू होती है जहां 15 सालों तक लोग एक द्वीप पर फंसे रहे जहां 60 लोगों को होना चाहिए था वहां आखिर में केवल सात लोग और एक बच्चा ही जीवित बचा।  1761 में फ्रांस का एक वाणिज्यिक जहाज जिसका नाम एल यूटल था मेडागास्कर से निकलता है मॉरीशस के लिए। इस जहाज में बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री अन्य वस्तुएं और सबसे महत्वपूर्ण कई अफ्रीकी मजदूर थे जिन्हें मॉरीशस बेचने के लिए ले जाया जा रहा था। यह सब गैरकानूनी ढंग से हो रहा था इन सब कामों से भी उपनिवेशी सरकार  व्यापार किया करती थी और लाभ कमाया करती थी‌ उस दौर में अफ्रीका के तमाम देशों से गांव-गांव से लोगों को जबरन उठाकर बाहर दुनिया में बेच दिया जाता था उनसे काम करवाया जाता था। इ...

ये ट्रंप नहीं सिकन्दर द्वितीय हैं | विश्व विजय का स्वप्न पूरा करने आऐ है

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अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र है निसंदेह वह आर्थिक शक्ति के तौर पर दुनिया का पहला है वही बात राजनीतिक ताकत की हो तो विश्व में सुपर पावर के नाम से हम अमेरिका को ही जानते हैं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कैसे दुनिया की शक्ति का केंद्रीकरण टूट गया ब्रिटेन जो महाशक्ति कहलाता था अब क्षीर्ण हो चुका था जर्मनी की ताकत ने ब्रिटेन जैसी महाशक्ति को कमजोर कर दिया ब्रिटेन अब वह ना रहा जिसके बारे में कहा जाता था कि उसका कभी सूर्य अस्त नहीं होता दुनिया के तमाम देश जो ब्रिटेन के उपनिवेश थे अब धीरे-धीरे उसके हाथ से छूट रहे थे तमाम देश आजादी के आंदोलन में बहुत सक्रिय होते चले गए और उनकी आजादी अब एकमात्र रास्ता था जो ब्रिटेन अपना सकता था अंततः महाशक्ति का उपनिवेश अब स्वतंत्र हो गए। भारत भी उनमें से एक था इस बड़े परिवर्तन के साथ विश्व की राजनीति में शक्ति का विकेंद्रीकरण हो गया अब ब्रिटेन के स्थान पर विश्व की शक्ति दो धुरी में बंट गई एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ सोवियत संघ अब यह दोनों राष्ट्र शक्तिशाली कहे जाने लगे कई वर्षों तक इनके बीच संघर्ष हुआ शीत युद्ध के नाम से यह संघर्ष चलता रहा दो महा शक्तियों के संघर...