ये ट्रंप नहीं सिकन्दर द्वितीय हैं | विश्व विजय का स्वप्न पूरा करने आऐ है
अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र है निसंदेह वह आर्थिक शक्ति के तौर पर दुनिया का पहला है वही बात राजनीतिक ताकत की हो तो विश्व में सुपर पावर के नाम से हम अमेरिका को ही जानते हैं द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कैसे दुनिया की शक्ति का केंद्रीकरण टूट गया ब्रिटेन जो महाशक्ति कहलाता था अब क्षीर्ण हो चुका था जर्मनी की ताकत ने ब्रिटेन जैसी महाशक्ति को कमजोर कर दिया ब्रिटेन अब वह ना रहा जिसके बारे में कहा जाता था कि उसका कभी सूर्य अस्त नहीं होता दुनिया के तमाम देश जो ब्रिटेन के उपनिवेश थे अब धीरे-धीरे उसके हाथ से छूट रहे थे तमाम देश आजादी के आंदोलन में बहुत सक्रिय होते चले गए और उनकी आजादी अब एकमात्र रास्ता था जो ब्रिटेन अपना सकता था अंततः महाशक्ति का उपनिवेश अब स्वतंत्र हो गए। भारत भी उनमें से एक था इस बड़े परिवर्तन के साथ विश्व की राजनीति में शक्ति का विकेंद्रीकरण हो गया अब ब्रिटेन के स्थान पर विश्व की शक्ति दो धुरी में बंट गई एक तरफ अमेरिका और दूसरी तरफ सोवियत संघ अब यह दोनों राष्ट्र शक्तिशाली कहे जाने लगे कई वर्षों तक इनके बीच संघर्ष हुआ शीत युद्ध के नाम से यह संघर्ष चलता रहा दो महा शक्तियों के संघर...